पर्वतीय लोक कला मंच द्वारा 21 मई, 2011 को दिल्ली के आई.टी.ओ. स्थित प्यारेलाल भवन में श्री हरिसुमन बिष्ट द्वारा लिखे गये उपन्यास आछरी-माछरी पर आधारित हिन्दी नाटक “आछरी-माछरी” का सफल मंचन किया गया। यह कहानी समाज में फैली विभिन्न कुरीतियों और समाज में अबला समझे जाने वाली स्त्री द्वारा विभिन्न सामाजिक परिस्थितियों से लड़ते हुए एक मुकाम हासिल करने की कहानी है।
लगभग खचाखच भरे सभागार में कई गणमान्य व्यक्ति, लेखक, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता आदि उपस्थित थे। प्रमुख उपस्थित लोगों में श्री पंकज बिष्ट, श्री हीरा सिंह राणा, श्री हरिसुमन बिष्ट, श्री प्रकाश उपाध्याय, श्री संजीव पांडे, श्री चंदन डांगी, श्री चारु तिवारी प्रमुख हैं।
हेम पंत द्वारा नाट्य रुपांतर किये गये नाटक का निर्देशन किया गंगा दत्त भट्ट। आछरी के रूप में भावना पंत, चंद्रा के रूप में ममता कर्नाटक व विसंभर के रूप में मनोज चंदोला का अभिनय लोगों ने काफी पसंद किया।
कुछ झलकियाँ
आछरी व विसंभर
आछरी व चन्दन
चन्द्रा व विसंभर तनाव के कुछ क्षणों में
मोहना जयदत्त व चन्दन
जूनजुनाली की महफिल
गोधना का नाच
पात्र परिचय
आछरी : भावना पंत
चन्द्रा : ममता कर्नाटक़
जयंती : गरिमा गुप्ता
जूनजुनाली : कमला भट्ट
वीरसिंह की पत्नी : लक्ष्मी रौतेला
बहिन : हिमाद्रि चंदोला
सूत्रधार : कमल कर्नाटक
वीरसिंह/ विशनसिंह डाकिया : के.एन.पाण्डेय
विसंभर : मनोज चंदोला
जयदत्त : हेम पंत
चन्दन : अखिलेष भट्ट
गोधना : गंगा दत्त भट्ट
मोहना (बाल) : आकाश भट्ट
मोहना (युवा) : आशीष शर्मा
पटवारी : आनन्द लटवाल
पेशकार/लीलू : भोपाल सिंह बिष्ट
गोलू/पुरुष : शमसेर सिंह
समूह : लक्ष्मी, कमला, गरिमा, शिखा बिष्ट
श्रेय
मूल उपन्यास : हरिसुमन बिष्ट
नाट्य रूपान्तर : हेम पंत
निर्देशक : गंगा दत्त भट्ट
प्रस्तुति नियंत्रक/ मंच व्यवस्था : मनोज चंदोला
संगीत निर्देशक : महेन्द्र पाण्डे
पार्श्व गायन : महेन्द्र पाण्डे, हरीश रावत, कौशल पांडे
दृश्य बंध : मनोज
रूप सज्जा : हरी खोलिया
प्रकाश : हरि सेमवाल
सभागार व्यवस्था : नारायण दत्त पंत, हीरा बल्लभ कांडपाल, आनन्द लटवाल
प्रचार एवं प्रसार : के.एन.पाण्डेय
RESPECTED HARISUMAN BISHT JI,HEM PANT JI.BHATT JI MANOJ CHANDOLA JI,MAHENDAR PANDEY JI,KAMAL KARNATAK JI,LAXMI ROTELA JI,BHAVANA PANT JI OR SABHI PARVATIYA LOK KALA MANCH DUARA PRASTUT NATAK KE SABHHI KALAKARO KO ACHHARI MACHHARI KE SUNDER ABHINYE PAR UTTARAKHAND CLUB SHAHDAR DELHI KE SABHI SADESHYO KI OR SE HARDIK BADHAI HO,PARAM PITA PARMENSHWAR SE PRATHANA KARTE HAI KI UTTARAKHAND KE LOK SANSKIRTI PURE BHARAT ME HI NAHI PURE VISHUV ME GUNJE, AJ HUM UCHHE SWARO ME KHE SAKTE HAI KI HUM SAKSHAM HAI, DEV BHUMI UTTARAKHANDI SABHI HAREK CHHETERO ME AGE HAI,JARRUT HAI TO HUM SAB KO UTTARAKHAND ME REHE RAHE LOGO KE ANDER JAGRUTTA OR EK ACHHE SHIKSHIT SAMAJ KE SATH SATH APNI UTTARAKHAND KI SANSKIRTE KO BACHANE KE LIYE KARIYE KARENE KE,YEHE TABHI SAMBHAV HAI JAB HUM SAB UTTARAKHANDI EK SATH EK VICHAR BANA KAR EK NAI UTTARAKHAND KA NIRMAN KAR SAKTE HAI
RESPECTED BISHT JI, PARVATIYA LOK KALA MANCH DUARA PRASTUT NATAK KE SABHHI KALAKARO KO ACHHARI MACHHARI KE SUNDER ABHINYE PAR Shail Kala Evam Gramin Vikas Samiti (Regd. 1986) DEHRADUN-UTTARAKHAND ke SABHI SADESHYO KI OR SE HARDIK BADHAI HO, LOK SANSKIRTI PURE BHARAT ME HI NAHI PURE VISHUV ME GUNJE,
HAMRI SANSTHA PICHHLE 25 VARSHO SE vILUPT pRAY pARVATIYA lOK sANSKRITI KE sANGRAKHAN HETU PRAYASRAT HAI.
SWAMI S CHANDRA
Sansthapak Adhyaksh, SHAIL KALA EVAM GRAMIN VIKAS SAMITI
79/2 New Chukhuwala, dehradun-248001 Uttarakhand